सोइ सयान जो परधन हारी
सोइ सयान जो परधन हारी
चौपाई ३, दोहा ९८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सोइ सयान जो परधन हारी। जो कर दंभ सो बड़ आचारी॥ जो कह झूँठ मसखरी जाना। कलिजुग सोइ गुनवंत बखाना॥ ३ ॥
अर्थ
जो [जिस किसी प्रकार से] दूसरे का धन हरण कर ले, वही बुद्धिमान् है। जो दम्भ करता है वही बड़ा आचारी है। जो झूठ बोलता है और हँसी-दिल्लगी करना जानता है, कलियुग में वही गुणवान् कहा जाता है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म-वृत्तांत और कलियुग की महिमा एवं भक्ति की शरण का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा