सनकादिक बिधि लोक सिधाए
सनकादिक बिधि लोक सिधाए
चौपाई १, दोहा ३६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सनकादिक बिधि लोक सिधाए। भ्रातन्ह राम चरन सिर नाए॥ पूछत प्रभुहि सकल सकुचाहीं। चितवहिं सब मारुतसुत पाहीं॥ १ ॥
अर्थ
सनकादि मुनि ब्रह्मलोक को चले गये। तब भाइयों ने श्रीरामजी के चरणों में सिर नवाया। सब भाई प्रभु से पूछते सकुचा रहे हैं। इसलिए सब हनुमानजी की ओर देख रहे हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भरत का प्रश्न, राम का उपदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा भरतजी के प्रश्न और राम के धर्म, भक्ति तथा संत-असंत-विवेक के उपदेश का वर्णन है।
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भरत का प्रश्न, राम का उपदेश