सचिवागवन नगर नृप मरना

चौपाई ३, दोहा ६५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सचिवागवन नगर नृप मरना। भरतागवन प्रेम बहु बरना॥ करि नृप क्रिया संग पुरबासी। भरत गए जहँ प्रभु सुख रासी॥ ३ ॥

अर्थ

फिर मन्त्री सुमन्त्रजी का नगर में लौटना, राजा दशरथजी का मरण, भरतजी का [ननिहाल से] अयोध्यामें आना और उनके प्रेम का बहुत वर्णन किया। राजा की अन्त्येष्टि क्रिया करके नगरनिवासियों को साथ लेकर भरतजी वहाँ गये जहाँ सुख की राशि प्रभु श्रीरामचन्द्रजी थे।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा