राजघाट सब बिधि सुंदर बर
राजघाट सब बिधि सुंदर बर
चौपाई २, दोहा २९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
राजघाट सब बिधि सुंदर बर। मज्जहिं तहाँ बरन चारिउ नर॥ तीर तीर देवन्ह के मंदिर। चहुँ दिसि तिन्ह के उपबन सुंदर॥ २ ॥
अर्थ
राजघाट सब प्रकार से सुन्दर और श्रेष्ठ है, जहाँ चारों वर्णों के पुरुष स्नान करते हैं। सरयूजी के किनारे-किनारे देवताओं के मन्दिर हैं, जिनके चारों ओर सुन्दर उपवन (बगीचे) हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।
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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन