ममता दादु कंडु इरषाई

चौपाई १७, दोहा १२१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

ममता दादु कंडु इरषाई। हरष बिषाद गरह बहुताई॥ पर सुख देखि जरनि सोइ छई। कुष्ट दुष्टता मन कुटिलई॥ १७ ॥

अर्थ

ममता दाद है, ईर्ष्या खुजली है, हर्ष-विषाद गले के रोगों की बहुताई है। पराये सुख को देखकर जो जलन होती है, वही क्षयी है। दुष्टता और मन की कुटिलता ही कोढ़ है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर” प्रकरण का चौपाई १७, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गरुड़ के सात प्रश्नों पर काकभुशुण्डि का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

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गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर