लघु बायस बपु धरि हरि संगा
लघु बायस बपु धरि हरि संगा
चौपाई ४, दोहा ७५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
लघु बायस बपु धरि हरि संगा। देखउँ बालचरित बहु रंगा॥ ४ ॥
अर्थ
छोटे-से कौए का शरीर धरकर और भगवान् के साथ-साथ फिरकर मैं उनके भाँति-भाँति के बालचरित्रों को देखा करता हूँ।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा