काम क्रोध मद लोभ परायन
काम क्रोध मद लोभ परायन
चौपाई ३, दोहा ३९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
काम क्रोध मद लोभ परायन। निर्दय कपटी कुटिल मलायन॥ बयरु अकारन सब काहू सों। जो कर हित अनहित ताहू सों॥ ३ ॥
अर्थ
वे काम, क्रोध, मद और लोभ के परायण तथा निर्दयी, कपटी, कुटिल और पापों के घर होते हैं। वे बिना ही कारण सब किसी से वैर किया करते हैं। जो भलाई करता है उसके साथ भी बुराई करते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भरत का प्रश्न, राम का उपदेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा भरतजी के प्रश्न और राम के धर्म, भक्ति तथा संत-असंत-विवेक के उपदेश का वर्णन है।
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भरत का प्रश्न, राम का उपदेश