कलिजुग जोग न जग्य न ग्याना

चौपाई ३, दोहा १०३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

कलिजुग जोग न जग्य न ग्याना। एक अधार राम गुन गाना॥ सब भरोस तजि जो भज रामहि। प्रेम समेत गाव गुन ग्रामहि॥ ३ ॥

अर्थ

कलियुग में न तो योग और यज्ञ है और न ज्ञान ही है। श्रीरामजी का गुणगान ही एकमात्र आधार है। अतएव सारे भरोसे त्यागकर जो श्रीरामजी को भजता है और प्रेम सहित उनके गुणसमूहों को गाता है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म-वृत्तांत और कलियुग की महिमा एवं भक्ति की शरण का वर्णन है।

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काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा