कहेउँ ग्यान सिद्धांत बुझाई
कहेउँ ग्यान सिद्धांत बुझाई
चौपाई १, दोहा १२० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
कहेउँ ग्यान सिद्धांत बुझाई। सुनहु भगति मनि कै प्रभुताई॥ राम भगति चिंतामनि सुंदर। बसइ गरुड़ जाके उर अंतर॥ १ ॥
अर्थ
मैंने ज्ञान का सिद्धान्त समझाकर कहा। अब भक्तिरूपी मणि की प्रभुता (महिमा) सुनिये। श्रीरामजी की भक्ति सुन्दर चिन्तामणि है। हे गरुड़जी! यह जिसके हृदय के अंदर बसती है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “ज्ञान और भक्ति की महिमा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में ज्ञान, भक्ति और ज्ञानदीपक के प्रतीक द्वारा भक्ति की सहज महिमा का वर्णन है।
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ज्ञान और भक्ति की महिमा