कछुक राम गुन कहेउँ बखानी

चौपाई ४, दोहा ५२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

कछुक राम गुन कहेउँ बखानी। अब का कहौं सो कहहु भवानी॥ सुनि सुभ कथा उमा हरषानी। बोली अति बिनीत मृदु बानी॥ ४ ॥

अर्थ

मैंने श्रीरामजी के कुछ थोड़े-से गुण बखानकर कहे हैं। हे भवानी! अब और क्या कहूँ? सुन्दर कथा सुनकर पार्वतीजी हर्षित हुईं और अत्यन्त विनम्र तथा कोमल वाणी बोलीं--

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा