जौं सब कें रह ग्यान एकरस
जौं सब कें रह ग्यान एकरस
चौपाई ३, दोहा ७८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं सब कें रह ग्यान एकरस। ईस्वर जीवहि भेद कहहु कस॥ माया बस्य जीव अभिमानी। ईस बस्य माया गुन खानी॥ ३ ॥
अर्थ
यदि जीवों को एकरस (अखण्ड) ज्ञान रहे, तो कहिये, फिर ईश्वर और जीव में भेद ही कैसा ? अभिमानी जीव माया के वश है और वह [सत्त्व, रज, तम—इन] तीनों गुणों की खान माया ईश्वर के वश में है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा