जदपि प्रथम दुख पावइ रोवइ बाल

दोहा ७४ (क) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

जदपि प्रथम दुख पावइ रोवइ बाल अधीर। ब्याधि नास हित जननी गनति न सो सिसु पीर॥ ७४ (क) ॥

अर्थ

यद्यपि बच्चा पहले दुःख पाता है और अधीर होकर रोता है, तो भी रोग के नाश के लिये माता बच्चे की उस पीड़ा को कुछ भी नहीं गिनती (उसकी परवा नहीं करती और फोड़े को चिरवा ही डालती है)।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का दोहा ७४ (क) है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा