जब रघुनाथ कीन्हि रन क्रीड़ा
जब रघुनाथ कीन्हि रन क्रीड़ा
चौपाई २, दोहा ५८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
जब रघुनाथ कीन्हि रन क्रीड़ा। समुझत चरित होति मोहि ब्रीड़ा॥ इंद्रजीत कर आपु बँधायो। तब नारद मुनि गरुड़ पठायो॥ २ ॥
अर्थ
जब श्रीरघुनाथजी ने ऐसी रणलीला की, जिस लीलाका स्मरण करने से मुझे लज्जा होती है—मेघनाद के हाथों अपने को बाँधा लिया—तब नारद मुनि ने गरुड़ को भेजा।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा