गयउ गरुड़ जहँ बसइ भुसुंडा
गयउ गरुड़ जहँ बसइ भुसुंडा
चौपाई १, दोहा ६३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
गयउ गरुड़ जहँ बसइ भुसुंडा। मति अकुंठ हरि भगति अखंडा॥ देखि सैल प्रसन्न मन भयऊ। माया मोह सोच सब गयऊ॥ १ ॥
अर्थ
गरुड़जी वहाँ गये जहाँ निर्बाध बुद्धि और पूर्ण भक्तिवाले काकभुशुण्डिजी बसते थे। उस पर्वत को देखकर उनका मन प्रसन्न हो गया और [उसके दर्शन से ही] सब माया, मोह तथा सोच जाता रहा।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा