एक बार गुर लीन्ह बोलाई
एक बार गुर लीन्ह बोलाई
चौपाई १, दोहा १०६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
एक बार गुर लीन्ह बोलाई। मोहि नीति बहु भाँति सिखाई॥ सिव सेवा कर फल सुत सोई। अबिरल भगति राम पद होई॥ १ ॥
अर्थ
एक बार गुरुजी ने मुझे बुला लिया और बहुत प्रकार से [परमार्थ] नीति की शिक्षा दी कि हे पुत्र! शिवजी की सेवा का फल यही है कि श्रीरामजी के चरणों में प्रगाढ़ भक्ति हो।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म-वृत्तांत और कलियुग की महिमा एवं भक्ति की शरण का वर्णन है।
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काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा