देखि चरित अति नर अनुसारी
देखि चरित अति नर अनुसारी
चौपाई १, दोहा ६९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि चरित अति नर अनुसारी। भयउ हृदयँ मम संसय भारी॥ सोइ भ्रम अब हित करि मैं माना। कीन्ह अनुग्रह कृपानिधाना॥ १ ॥
अर्थ
बिलकुल ही लौकिक मनुष्यों जैसा चरित्र देखकर मेरे हृदय में भारी सन्देह हो गया। अब मैं उस भ्रम को अपने लिए हितकर मानता हूँ। कृपानिधान ने मुझ पर यह बड़ा अनुग्रह किया।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा