भाव बस्य भगवान सुख निधान करुना
भाव बस्य भगवान सुख निधान करुना
सोरठा ९२ (ख) · उत्तरकाण्ड
सोरठा पाठ
भाव बस्य भगवान सुख निधान करुना भवन। तजि ममता मद मान भजिअ सदा सीतारवन॥ ९२ (ख) ॥
अर्थ
सुख के भण्डार, करुणाधाम भगवान् भाव (प्रेम) के वश हैं। [अतएव] ममता, मद और मान को छोड़कर सदा श्रीजानकीनाथजी का ही भजन करना चाहिये।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का सोरठा ९२ (ख) है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा