भए लोग सब मोहबस लोभ ग्रसे
भए लोग सब मोहबस लोभ ग्रसे
दोहा ९७ (ख) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
भए लोग सब मोहबस लोभ ग्रसे सुभ कर्म। सुनु हरिजान ग्यान निधि कहउँ कछुक कलिधर्म॥ ९७ (ख) ॥
अर्थ
सभी लोग मोह के वश हो गये, शुभ कर्मों को लोभ ने हड़प लिया। हे ज्ञान के भण्डार! हे श्रीहरि के वाहन! सुनिये, अब मैं कलि के कुछ धर्म कहता हूँ।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा” प्रकरण का दोहा ९७ (ख) है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म-वृत्तांत और कलियुग की महिमा एवं भक्ति की शरण का वर्णन है।
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काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा