अति आदर खगपति कर कीन्हा
अति आदर खगपति कर कीन्हा
चौपाई ४, दोहा ६३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
अति आदर खगपति कर कीन्हा। स्वागत पूछि सुआसन दीन्हा॥ करि पूजा समेत अनुरागा। मधुर बचन तब बोलेउ कागा॥ ४ ॥
अर्थ
उन्होंने पक्षिराज गरुड़जी का बहुत ही आदर-सत्कार किया और स्वागत पूछकर बैठने के लिये सुन्दर आसन दिया। फिर प्रेम सहित पूजा करके काकभुशुण्डिजी मधुर वचन बोले--।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा