ऐसे अधम मनुज खल कृतजुग त्रेताँ

दोहा ४० · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

ऐसे अधम मनुज खल कृतजुग त्रेताँ नाहिं। द्वापर कछुक बृंद बहु होइहहिं कलिजुग माहिं॥ ४० ॥

अर्थ

ऐसे अधम और दुष्ट मनुष्य सत्ययुग और त्रेता में नहीं होते। द्वापर में थोड़े-से होंगे और कलियुग में तो इनके झुंड-के-झुंड होंगे।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भरत का प्रश्न, राम का उपदेश” प्रकरण का दोहा ४० है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा भरतजी के प्रश्न और राम के धर्म, भक्ति तथा संत-असंत-विवेक के उपदेश का वर्णन है।

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भरत का प्रश्न, राम का उपदेश