तव प्रेरित मायाँ उपजाए

चौपाई २, दोहा ५९ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

तव प्रेरित मायाँ उपजाए। सृष्टि हेतु सब ग्रंथनि गाए॥ प्रभु आयसु जेहि कहँ जस अहई। सो तेहि भाँति रहें सुख लहई॥ २ ॥

अर्थ

आपकी प्रेरणा से माया ने इन्हें सृष्टि के लिये उत्पन्न किया है, सब ग्रन्थों ने यही गाया है। जिसके लिये स्वामी की जैसी आज्ञा है, वह उसी प्रकार से रहने में सुख पाता है।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “राम का क्रोध, समुद्र की विनती” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के धर्मसम्मत क्रोध और भयभीत समुद्र की विनम्र प्रार्थना एवं मार्गदर्शन का वर्णन है।

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राम का क्रोध, समुद्र की विनती