प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्ही
प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्ही
चौपाई ३, दोहा ५९ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्ही। मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्ही॥ ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥ ३ ॥
अर्थ
प्रभु ने अच्छा किया जो मुझे शिक्षा (दण्ड) दी; किन्तु मर्यादा (जीवों का स्वभाव) भी आपकी ही बनायी हुई है। ढोल, गँवार, शूद्र, पशु और स्त्री--ये सब शिक्षाके अधिकारी हैं।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “राम का क्रोध, समुद्र की विनती” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के धर्मसम्मत क्रोध और भयभीत समुद्र की विनम्र प्रार्थना एवं मार्गदर्शन का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
राम का क्रोध, समुद्र की विनती