तव कुल कमल बिपिन दुखदाई

चौपाई ५, दोहा ३६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

तव कुल कमल बिपिन दुखदाई। सीता सीत निसा सम आई॥ सुनहु नाथ सीता बिनु दीन्हें। हित न तुम्हार संभु अज कीन्हें॥ ५ ॥

अर्थ

सीता आपके कुलरूपी कमलों के वन को दुःख देनेवाली जाड़े की रात्रि के समान आयी है। हे नाथ! सुनिये, सीता को दिये बिना शम्भु और ब्रह्मा के किये भी आपका भला नहीं हो सकता।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “मंदोदरी-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता लौटाने और राम के सामर्थ्य की चेतावनी का वर्णन है।

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मंदोदरी-रावण संवाद