तव अनुचरीं करउँ पन मोरा
तव अनुचरीं करउँ पन मोरा
चौपाई ३, दोहा ९ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
तव अनुचरीं करउँ पन मोरा। एक बार बिलोकु मम ओरा॥ तृन धरि ओट कहति बैदेही। सुमिरि अवधपति परम सनेही॥ ३ ॥
अर्थ
मैं तुम्हारी दासी बना दूँगा, यह मेरा प्रण है। तुम एक बार मेरी ओर देखो तो सही! अपने परम स्नेही कोसलाधीश श्रीरामचन्द्रजी का स्मरण करके जानकीजी तिनके की आड़ करके कहने लगीं—
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अशोकवाटिका में हनुमान का सीता-दर्शन और रावण द्वारा साम-दाम-भय से सीताजी को विचलित करने के प्रयास का वर्णन है।
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हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना