तात राम नहिं नर भूपाला

चौपाई १, दोहा ३९ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

तात राम नहिं नर भूपाला। भुवनेस्वर कालहु कर काला॥ ब्रह्म अनामय अज भगवंता। ब्यापक अजित अनादि अनंता॥ १ ॥

अर्थ

हे तात! राम मनुष्यों के ही राजा नहीं हैं। वे समस्त लोकों के स्वामी और काल के भी काल हैं। वे [सम्पूर्ण ऐश्वर्य, यश, श्री, धर्म, वैराग्य एवं ज्ञान के भण्डार] भगवान्‌ हैं; वे निरामय (विकाररहित), अजन्मा, व्यापक, अजेय, अनादि और अनन्त ब्रह्म हैं।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की रावण को सलाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण द्वारा रावण को नीति-उपदेश और रावण के अपमान के बाद विभीषण का लंका-त्याग निश्चय का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
विभीषण की रावण को सलाह