सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना
सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना
चौपाई ५, दोहा ४३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना। सरनागत बच्छल भगवाना॥ ५ ॥
अर्थ
प्रभु के वचन सुनकर हनुमानजी हर्षित हुए [और मन-ही-मन कहने लगे कि] भगवान् कैसे शरणागतवत्सल हैं [शरण में आये हुए पर पिता की भाँति प्रेम करनेवाले हैं]।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की राम शरण” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण के लंका त्यागकर श्रीराम की शरण में आने और प्रभु द्वारा कृपापूर्वक स्वीकार किए जाने का वर्णन है।
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विभीषण की राम शरण