सुनि कपि बचन बहुत खिसिआना
सुनि कपि बचन बहुत खिसिआना
चौपाई ३, दोहा २४ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि कपि बचन बहुत खिसिआना। बेगि न हरहु मूढ़ कर प्राना॥ सुनत निसाचर मारन धाए। सचिवन्ह सहित बिभीषनु आए॥ ३ ॥
अर्थ
हनुमानजी के वचन सुनकर वह बहुत ही कुपित हो गया [और बोला--] ओरे! इस मूर्ख का प्राण शीघ्र ही क्यों नहीं हर लेते? सुनते ही राक्षस उन्हें मारने दौड़े। उसी समय मन्त्रियों के साथ विभीषणजी वहाँ आ पहुँचे।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की सभा में हनुमान का निर्भीक संवाद और सीता-वापसी का उपदेश का वर्णन है।
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हनुमान-रावण संवाद