सीता तैं मम कृत अपमाना

चौपाई १, दोहा १० के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

सीता तैं मम कृत अपमाना। कटिहउँ तव सिर कठिन कृपाना॥ नाहिं त सपदि मानु मम बानी। सुमुखि होति न त जीवन हानी॥ १ ॥

अर्थ

सीता! तूने मेरा अपमान किया है। मैं तेरा सिर इस कठोर कृपाण से काट डालूँगा। नहीं तो [अब भी] जल्दी मेरी बात मान ले। हे सुमुखि! नहीं तो जीवन से हाथ धोना पड़ेगा!

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अशोकवाटिका में हनुमान का सीता-दर्शन और रावण द्वारा साम-दाम-भय से सीताजी को विचलित करने के प्रयास का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना