सावधान मन करि पुनि संकर
सावधान मन करि पुनि संकर
चौपाई २, दोहा ३३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सावधान मन करि पुनि संकर। लागे कहन कथा अति सुंदर॥ कपि उठाइ प्रभु हृदयँ लगावा। कर गहि परम निकट बैठावा॥ २ ॥
अर्थ
फिर मन को सावधान करके शंकरजी अत्यन्त सुन्दर कथा कहने लगे--हनुमानजी को उठाकर प्रभु ने हृदय से लगाया और हाथ पकड़कर अत्यन्त निकट बैठा लिया।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।
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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश