सठ सूनें हरि आनेहि मोही

चौपाई ५, दोहा ९ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

सठ सूनें हरि आनेहि मोही। अधम निलज्ज लाज नहिं तोही॥ ५ ॥

अर्थ

रे पापी! तू मुझे सूने में हर लाया है। रे अधम! निर्लज्ज! तुझे लज्जा नहीं आती?

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अशोकवाटिका में हनुमान का सीता-दर्शन और रावण द्वारा साम-दाम-भय से सीताजी को विचलित करने के प्रयास का वर्णन है।

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हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना