प्रनतपाल रघुनायक करुना सिंधु खरारि
प्रनतपाल रघुनायक करुना सिंधु खरारि
दोहा २२ · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
प्रनतपाल रघुनायक करुना सिंधु खरारि। गएँ सरन प्रभु राखिहैं तव अपराध बिसारि॥ २२ ॥
अर्थ
खर के शत्रु श्रीरघुनाथजी शरणागतों के रक्षक और दया के समुद्र हैं। शरण जाने पर प्रभु तुम्हारा अपराध भुलाकर तुम्हें अपनी शरण में रख लेंगे।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-रावण संवाद” प्रकरण का दोहा २२ है। इस प्रकरण में रावण की सभा में हनुमान का निर्भीक संवाद और सीता-वापसी का उपदेश का वर्णन है।
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हनुमान-रावण संवाद