नाथ काजु कीन्हेउ हनुमाना

चौपाई ३, दोहा २९ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

नाथ काजु कीन्हेउ हनुमाना। राखे सकल कपिन्ह के प्राना॥ सुनि सुग्रीव बहुरि तेहि मिलेऊ। कपिन्ह सहित रघुपति पहिं चलेऊ॥ ३ ॥

अर्थ

हे नाथ! हनुमानजी ने ही सब कार्य किया और सब वानरों के प्राण बचा लिये। यह सुनकर सुग्रीवजी हनुमानजी से फिर मिले और सब वानरों समेत श्रीरघुनाथजी के पास चले।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।

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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश