नर बानरहि संग कहु कैसें
नर बानरहि संग कहु कैसें
चौपाई ६, दोहा १३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
नर बानरहि संग कहु कैसें। कही कथा भइ संगति जैसें॥ ६ ॥
अर्थ
नर और वानर का संग कैसे हुआ? तब हनुमानजी ने जैसे संगति हुई थी, वह सब कथा कही।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “श्रीसीता-हनुमान संवाद” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी को श्रीराम की मुद्रिका और संदेश देने तथा उनके प्रभु-आगमन की आशा का संवाद का वर्णन है।
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श्रीसीता-हनुमान संवाद