कह सुक नाथ सत्य सब बानी
कह सुक नाथ सत्य सब बानी
चौपाई २, दोहा ५७ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
कह सुक नाथ सत्य सब बानी। समुझहु छाड़ि प्रकृति अभिमानी॥ सुनहु बचन मम परिहरि क्रोधा। नाथ राम सन तजहु बिरोधा॥ २ ॥
अर्थ
शुक (दूत) ने कहा--हे नाथ! अभिमानी स्वभाव को छोड़कर [इस पत्र में लिखी] सब बातों को सत्य समझिये। क्रोध छोड़कर मेरा वचन सुनिये। हे नाथ! श्रीरामजी से बैर त्याग दीजिये।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।
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शुक की रावण को चेतावनी