हरषे सब बिलोकि हनुमाना
हरषे सब बिलोकि हनुमाना
चौपाई २, दोहा २८ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
हरषे सब बिलोकि हनुमाना। नूतन जन्म कपिन्ह तब जाना॥ मुख प्रसन्न तन तेज बिराजा। कीन्हेसि रामचंद्र कर काजा॥ २ ॥
अर्थ
हनुमानजी को देखकर सब हर्षित हो गये और तब वानरों ने अपना नया जन्म समझा। हनुमानजी का मुख प्रसन्न था और शरीर में तेज विराजमान था, [जिससे उन्होंने समझ लिया कि] ये श्रीरामचन्द्रजी का कार्य कर आये हैं।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।
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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश