चलेउ नाइ सिरु पैठेउ बागा

चौपाई १, दोहा १८ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

चलेउ नाइ सिरु पैठेउ बागा। फल खाएसि तरु तोरैं लागा॥ रहे तहाँ बहु भट रखवारे। कछु मारेसि कछु जाइ पुकारे॥ १ ॥

अर्थ

वे सीताजी को सिर नवाकर चले और बाग में घुस गये। फल खाये और वृक्षों को तोड़ने लगे। वहाँ बहुत-से योद्धा रखवाले थे। उनमें से कुछ को मार डाला और कुछ ने जाकर पुकारे--।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा अशोकवाटिका विध्वंस, अक्षयकुमार वध और मेघनाद के नागपाश में बँधकर रावण-सभा में जाने का वर्णन है।

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अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना