चलत मोहि चूड़ामनि दीन्ही
चलत मोहि चूड़ामनि दीन्ही
चौपाई १, दोहा ३१ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
चलत मोहि चूड़ामनि दीन्ही। रघुपति हृदयँ लाइ सोइ लीन्ही॥ नाथ जुगल लोचन भरि बारी। बचन कहे कछु जनककुमारी॥ १ ॥
अर्थ
चलते समय उन्होंने मुझे चूड़ामणि [उतारकर] दी। श्रीरघुनाथजी ने उसे लेकर हृदय से लगा लिया। [हनुमानजी ने फिर कहा--] हे नाथ! दोनों नेत्रों में जल भरकर जानकीजी ने मुझसे कुछ वचन कहे--।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।
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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश