अनुज सहित मिलि ढिग बैठारी

चौपाई २, दोहा ४६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

अनुज सहित मिलि ढिग बैठारी। बोले बचन भगत भयहारी॥ कहु लंकेस सहित परिवारा। कुसल कुठाहर बास तुम्हारा॥ २ ॥

अर्थ

छोटे भाई लक्ष्मणजी सहित गले मिलकर उनको अपने पास बैठाकर श्रीरामजी भक्तों के भय को हरनेवाले वचन बोले—हे लंकेश! परिवार सहित अपनी कुशल कहो। तुम्हारा निवास बुरी जगह पर है।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की राम शरण” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण के लंका त्यागकर श्रीराम की शरण में आने और प्रभु द्वारा कृपापूर्वक स्वीकार किए जाने का वर्णन है।

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विभीषण की राम शरण