अजर अमर गुननिधि सुत होहू

चौपाई २, दोहा १७ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

अजर अमर गुननिधि सुत होहू। करहुँ बहुत रघुनायक छोहू॥ करहुँ कृपा प्रभु अस सुनि काना। निर्भर प्रेम मगन हनुमाना॥ २ ॥

अर्थ

हे पुत्र! तुम अजर (बुढ़ापे से रहित), अमर और गुणों के खजाने होओ। श्रीरघुनाथजी तुम पर बहुत कृपा करें। “प्रभु कृपा करें” ऐसा कानों से सुनते ही हनुमानजी पूर्ण प्रेम में मग्न हो गये।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “श्रीसीता-हनुमान संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी को श्रीराम की मुद्रिका और संदेश देने तथा उनके प्रभु-आगमन की आशा का संवाद का वर्णन है।

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श्रीसीता-हनुमान संवाद