यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा
यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा
चौपाई १, दोहा १० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा। उभय प्रकार सुजसु जग तोरा॥ सुत सन कह दसकंठ रिसाई। असि मति सठ केहिं तोहि सिखाई॥ १ ॥
अर्थ
हे प्रभो! यदि आप मेरी यह सम्मति मानेंगे, तो जगत् में दोनों ही प्रकार से आपका सुयश होगा। रावण ने गुस्से में भरकर पुत्र से कहा-अरे मूर्ख! तुझे ऐसी बुद्धि किसने सिखायी?।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।
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मंदोदरी का रावण को उपदेश