तात सकल तव पुन्य प्रभाऊ

चौपाई २, दोहा ११२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

तात सकल तव पुन्य प्रभाऊ। जीत्यों अजय निसाचर राऊ॥ सुनि सुत बचन प्रीति अति बाढ़ी। नयन सलिल रोमावलि ठाढ़ी॥ २ ॥

अर्थ

[श्रीरामजी ने कहा--] हे तात! यह सब आपके पुण्यों का प्रभाव है, जो मैंने अजेय राक्षसराज को जीत लिया। पुत्र के वचन सुनकर उनकी प्रीति अत्यन्त बढ़ गयी। नेत्रों में जल छा गया और रोमावली खड़ी हो गयी।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की राम-स्तुति और इन्द्र द्वारा अमृत वर्षा से वानर-भालुओं का पुनर्जीवन का वर्णन है।

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देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा