ताके गुन गन कछु कहे जड़मति
ताके गुन गन कछु कहे जड़मति
दोहा १०१ क · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
ताके गुन गन कछु कहे जड़मति तुलसीदास। जिमि निज बल अनुरूप ते माछी उड़इ अकास॥ १०१ क ॥
अर्थ
उसी चरित्र के कुछ गुणगण मन्दबुद्धि तुलसीदास ने कहे हैं, जैसे मक्खी भी अपने बल के अनुसार आकाश में उड़ती है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का दोहा १०१ क है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।
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राम-रावण युद्ध, रावण वध