सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान
सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान
दोहा ६२ · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान। जगदंबा हरि आनि अब सठ चाहत कल्यान॥ ६२ ॥
अर्थ
तब दशकंधर के वचन सुनकर कुम्भकर्ण बिलखकर (दुखी होकर) बोला--अरे मूर्ख! जगदंबा को हर लाकर अब तू कल्याण चाहता है ?।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण का जागना और उपदेश” प्रकरण का दोहा ६२ है। इस प्रकरण में रावण द्वारा कुंभकर्ण को जगाने, उसके कठोर उपदेश और विभीषण से सार्थक संवाद का वर्णन है।
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कुंभकर्ण का जागना और उपदेश