सुनि अंगद सकोप कह बानी
सुनि अंगद सकोप कह बानी
चौपाई १, दोहा २६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभारि अधम अभिमानी॥ सहसबाहु भुज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कुठारा॥ १ ॥
अर्थ
रावण के ये वचन सुनकर अंगद क्रोध सहित वचन बोले--अरे नीच अभिमानी! सँभालकर (सोच-समझकर) बोल। जिनका फरसा सहस्रबाहु की भुजाओं रूपी अपार वन को जलाने के लिए अग्नि के समान था।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद