सखा धर्ममय अस रथ जाकें
सखा धर्ममय अस रथ जाकें
चौपाई ६, दोहा ८० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सखा धर्ममय अस रथ जाकें। जीतन कहँ न कतहुँ रिपु ताकें॥ ६ ॥
अर्थ
हे सखे! ऐसा धर्ममय रथ जिसके हो, उसके लिए जीतने को कहीं शत्रु ही नहीं है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ८० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण के युद्ध-प्रस्थान, राम के विजय रथ के महात्म्य और वानर-राक्षस संग्राम का वर्णन है।
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रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ