पुनि प्रभु आइ त्रिबेनीं हरषित मज्जनु

दोहा १२० (ख) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

पुनि प्रभु आइ त्रिबेनीं हरषित मज्जनु कीन्ह। कपिन्ह सहित बिप्रन्ह कहुँ दान बिबिध बिधि दीन्ह॥ १२० (ख) ॥

अर्थ

फिर त्रिवेणी में आकर प्रभु ने हर्षित होकर स्नान किया और कपियों सहित ब्राह्मणों को अनेकों प्रकार के दान दिये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान” प्रकरण का दोहा १२० (ख) है। इस प्रकरण में श्रीसीता-रामजी का पुष्पक विमान पर आरूढ़ होकर अयोध्या की ओर आनंदमयी प्रस्थान का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान