प्रीति बिरोध समान सन करिअ नीति

दोहा २३ (ग) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

प्रीति बिरोध समान सन करिअ नीति असि आहि। जौं मृगपति बध मेडुकन्हि भल कि कहइ कोउताहि॥ २३ (ग) ॥

अर्थ

प्रीति और बैर बराबरीवाले से ही करना चाहिये, नीति ऐसी ही है। सिंह यदि मेढकों को मारे, तो क्या उसे कोई भला कहेगा ?

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का दोहा २३ (ग) है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद