कुंभकरन कपि फौज बिडारी
कुंभकरन कपि फौज बिडारी
चौपाई ४, दोहा ६७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
कुंभकरन कपि फौज बिडारी। सुनि धाई रजनीचर धारी॥ देखी राम बिकल कटकाई। रिपु अनीक नाना बिधि आई॥ ४ ॥
अर्थ
कुम्भकर्ण ने वानर-सेना को तितर-बितर कर दिया। यह सुनकर राक्षस-सेना भी दौड़ी। श्रीरामचन्द्रजी ने देखा कि अपनी सेना व्याकुल है और शत्रु की नाना प्रकार की सेना आ गयी है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।
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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति