जो अति सुभट सराहेहु रावन
जो अति सुभट सराहेहु रावन
चौपाई ५, दोहा २३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जो अति सुभट सराहेहु रावन। सो सुग्रीव केर लघु धावन॥ चलइ बहुत सो बीर न होई। पठवा खबरि लेन हम सोई॥ ५ ॥
अर्थ
हे रावण! जिसको तुमने बहुत बड़ा योद्धा कहकर सराहा है, वह तो सुग्रीव का एक छोटा-सा दौड़कर चलनेवाला हरकारा है। वह बहुत चलता है, वीर नहीं है। उसको तो हमने [केवल] खबर लेने के लिये भेजा था।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद