जिन्ह कर नासा कान निपाता
जिन्ह कर नासा कान निपाता
चौपाई ५, दोहा ५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जिन्ह कर नासा कान निपाता। तिन्ह रावनहि कही सब बाता॥ सुनत श्रवन बारिधि बंधाना। दस मुख बोलि उठा अकुलाना॥ ५ ॥
अर्थ
जिन राक्षसों के नाक और कान काट डाले गये, उन्होंने रावण से सब समाचार कहा। समुद्र [पर सेतु] का बाँधा जाना कानों से सुनते ही रावण घबड़ाकर दसों मुखों से बोल उठा--
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम का समुद्र पार, सुबेल पर निवास” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम का सेना सहित समुद्र पार कर सुबेल पर्वत पर डेरा और रावण की व्याकुलता का वर्णन है।
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राम का समुद्र पार, सुबेल पर निवास